करवा चौथ की शाम


हेलो एवेरिवन, आइ’एम समीर फ्रॉम दिल्ली, मेरी गली से 2 गली छोड़के एक घर है जिसमे एक बहुत खूबसूरत औरत एक बच्चा और एक आदमी रहते है.

हमारा एरिया ज़्यादा भरा हुआ नही है, मतलब ज़्यादातार सुनसान ही रहता है शाम को तो कुछ ज़्यादा ही.

ये करवा चौथ की शाम की बात है, मै कही से आ रहा था तो रास्ते मे वो घर भी पड़ता है, मै अक्सर उस तरफ देखा करता था.

आख़िर वो थी ही इतनी खूबसूरत हर कोई उसे देखना चाहता था

पर उसे बहुत घुस्सा आता था जब वो मुझे देखती थी, थोड़ा बदनाम हू अपनी कॉलोनी मे इसलिए.

खैर करवा चौथ की शाम जब मै आ रहा था तो नज़रे गई उसके घर की टरफ़

पर वो दिखी नही

मई कुछ देर बाद घर से शाम को 8 बजे फिर निकला उसे देखने की चाहत मे

किस्मत ने साथ दिया वो अपने 4 साल के बच्चे के साथ बैठी हुई थी घर की दहलीज़ पर

मै उसे देखते हुए निकल गया

मैने शॉप जाके 2 चॉक्लेट्स ली और वापस आने लगा

मैने फिर उसे देखा

वो जानती थी मै उसे देखता हू बुरी नज़रो से

आज उसने मुझसे निगाहे मिलाई और घुस्से से मुझे देख रही थी जैसे धमकी दे रही हो

और देखकर घर मे चली गई .

मुझे सच मै बहुत बेज़्ज़ती महसूस हुई

मैने सोचा जब वो इतनी खूबसूरत है तो मेरी क्या ग़लती कोई भी देखना चाहेगा उसे

मै उसके दरवाज़े पर आ गया और उसे समझाने के लिए

दरवाज़ा नॉक किया

दरवाज़ा खुला

पर मुझे कुछ बोलने का मोका ही नही दिया उसने और मुझे उल्टा सीधा कहने लगी और धमकी दी की अगर मैने फिर कभी उसे देखा तो रेप का झूठा इल्ज़ाम लगा कर अंदर करवा देगी.

उसकी ये बात सच मे चुभने वाली थी और मुझे भी घुस्सा आ गया

एक टरफ़ वो सारी पहन के पूरी तरह सजी हुई थी एकदम दुल्हन लग रही थी

उसके लिपस्टिक से रंगे लाल होंठो को अपने होंठो मे डबोच लिया और ज़बरदस्ती चूमने लगा

ऊओंम्महााआआ

उउउम्म्म्मम

मुझे अच्छा लग रहा था उफ़फ्फ़ जिसे रोज़ देखा करता था आज उसके होंठो को चूम रहा हू

पर वो है की किस मे साथ नही दे रही थी

मै फिर भी चूम रहा था

मै उसके होंठो को चूमते हुए उसकी गर्दन को चूमने लगा पता नही चला कब मेरा हाथ उसकी चुचिया मसलने लगा

मै उसके उप्पर बैठा हुआ था और उसकी चुचिया मसल रहा था ब्लाउस के उप्पर से ही और उसके होंठ चूम रहा था

मैने उसकी ज़ुल्फो को पकड़ के उसे उल्टा किया और उसकी गर्दन को चूमते हुए उसकी पीठ को चूमते हुए नीचे आ रहा था

और उसके ब्लाउस की डोरी पर आ कर रुक गया

और फिर उसके ब्लाउस को अपने मूह से खोल दिया

मेरा एक हाथ उसकी मोटी गोल गांड को सहला रहा था

और उसकी नंगी पीठ को चूम रहा, थोड़ी पकड़ ढीली हो गई ग़लती से


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